कोरोना के कारण भारत में बढ़ रहे बेरोजगारी का प्रभाव विभिन्न राज्यों पर असमान रूप से पड़ा है

कोरोनावायरस संक्रमण से निपटने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण देश में बेरोजगारी दर लगातार बढ़ती जा रही है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी की रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल में मासिक बेरोजगारी दर 23.52 फीसदी दर्ज की गई है जो मार्च में 8.74 फीसदी थी।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए 25 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन लागू करते समय ही विश्लेषकों ने बेरोजगारी की चेतावनी दी थी। लॉकडाउन के चलते आर्थिक गतिविधियों में ठहराव आ गया और दिल्ली तथा मुंबई जैसे शहरी केंद्रों से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों के पलायन से विश्लेषकों की आशंकाएं सही साबित हुई।

राज्य ने अब तक इस संकट से निपटने के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपये के राजकोषीय प्रोत्साहन की घोषणा की है। जिसका बड़ा हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को आय और भोजन सहायता मुहैया कराने के लिए है। सीएमआई की साप्ताहिक श्रृंखला के आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद बेरोजगारी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और यह 29 मार्च को सप्ताह के दौरान 23.81 फीसदी थी। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी (सीएमआईई) ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में कहा है कि कोविड-19 संकट के चलते देश में बेरोजगारी दर 3 मई को सप्ताह के दौरान बढ़कर 27.11 फीसदी हो गई। 

कोरोनावायरस के प्रसार के साथ ही लगभग हर हफ्ते किसी ना किसी क्षेत्र में हजारों कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी देने, नौकरियों से निकाले जाने और वेतन में भारी कटौती की खबरें आ रही हैं। मॉल्स, रेस्तरां, बार होटल सब बंद है। विमान सेवाओं और अन्य आवाजाही के साधनों पर रोक लगी हुई है। फैक्ट्रियां कारखाने सभी ठप पड़े हैं। ऐसे में संस्थान लगातार लोगों की छंटनी कर रही है और हर कोई इसी डर के साए में जी रहा है कि ना जाने कब उसकी नौकरी चली जाए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरी पर इलाकों में मां बेरोजगारी दर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक है। लॉकडाउन में दिहाड़ी मजदूरों और छोटे व्यवसायों से जुड़े लोगों को भारी झटका लगा है। राज्यवार देखा जाए तो अप्रैल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर पुडुचेरी 75.80 फीसदी रही। इसके बाद तमिलनाडु में 49.8 फीसदी, झारखंड में 47.1 फ़ीसदी, बिहार में 46.6 फ़ीसदी, हरियाणा में 43.2 फीसदी, महाराष्ट्र में 20.9 फ़ीसदी, कर्नाटक में 29.8 फ़ीसदी और उत्तर प्रदेश में 21.5 फीसदी दर्ज की गई। पर्वतीय राज्यों में बेरोजगारी दर बाकी राज्यों की तुलना में कम रही। उत्तराखंड में बेरोजगारी की दर 6.5 फ़ीसदी सिक्किम में 2.3 फ़ीसदी और हिमाचल प्रदेश में 2.2  फ़ीसदी रही। 

सीएमआईई की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था को सुधारने में काफी समय लग सकता है और श्रमिकों के लिए अभी आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं।

लेखकः

कैलाश कुमार

2 thoughts on “कोरोना के कारण भारत में बढ़ रहे बेरोजगारी का प्रभाव विभिन्न राज्यों पर असमान रूप से पड़ा है

  • July 19, 2020 at 6:03 PM
    Permalink

    Government should take serious measures and prepare a full proof plan so than unemployment developed due to covid should be minimised….
    Nonetheless, you explained it very well…keep going…good luck..

    Reply
  • July 24, 2020 at 1:41 PM
    Permalink

    धन्यवाद हौसला अफजाई के लिए।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.